मौसम बदले दिन-रात भले,
हम नहीं अब बदलने वाले।
फितरत ऐसी ही पाई है हमनें,
याद सदा रखेगें वो भूलने वाले।
कह लें जो कहना है सबको,
हम नहीं अब सुधरने वाले।
समेट लिया है खुद को खुद मे,
जतन करें कोई लाख भले
हम नहीं अब बिखरने वाले।
मौसम बदले दिन-रात भले,
हम नहीं अब बदलने वाले........
मुकेश दूहन
सोनीपत, हरियाणा

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