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दिल की ये ख्वाहिश थी
कभी कोई मुझे भी प्यार करता
कब निकलूंगी घर से बाहर
यह इंतजार करता
अच्छा लगता उसको
मेरा हौले से मुस्काना
मेरी एक झलक पाने को
वह रहता दीवाना
मेरी तारीफों में वो
कविताएँ लिखता
मेरी आँखों को सागर,
जुल्फों को घटायें लिखता
कहता जब हँसती हो
फ़िज़ा में ख़ुशबू बिखर जाती है
तेरे आगे चाँद की चमक
मुझे फ़ीकी नज़र आती हैं
हूँ मैं सबसे खास इसका
हर पल एहसास कराता
मुझको पाने की ख़ातिर
वह दुनिया से लड़ जाता
पर ऐसा कोई न मिला यह भी अच्छी बात रही
जो किस्मत से बना हमसफर उनसे बेहतर कोई नही
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–प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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