दिल से पहल करके रूह में
उतारा था।
सारे उसूलों को विसारा था।
कभी जागी आँखों से,
कभी उन्नीदी नीदों में पुकारा था।
तुम कहते हो समझ न पाए,
शायद सच ही कहा
जाने क्यों समझ न पाए तुम ,
बहुत मासूम सा
पाक साफ सा रूहानी इश्क
हमारा था।
आज भी याद करके पलकों
से अश्क गिरते हैं,
यकीं नही होता,
बस एक जिद के लिए
आपने मांगा चन्द दिन को साथ हमारा था।
सुला दिया है हमने अब ,
दिल के सब अहसासों को।
कहकर यह तुमको दिया भुला,
चला गया वो न आएगा,
वो एक आवारा बंजारा था।
प्यार बफा अब बचा नहीं,
यहाँ कोई किसी का सगा नही
था कुछ खाली वक्त उसका,
जो साथ तेरे गुजारा था।
जाते जाते सीख दे गया,
जीवन को सच्चाई की,
मैने लौटा दी बेरुख होकर,
याद तुम्हारी जो आयी थी,
अब एक सबक ही तरह हर लम्हां
याद तुम्हारा था।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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