बेटी- है तो, माँ के अरमान है,
बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! 
बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, 
बेटी- है तो, मायका शब्द है! 

बेटी- है तो, डोली है, 
बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! 
बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! 
बेटी- है तो, घर- संसार है, 
बेटी- है तो, चौखट और द्वार है! 

बेटी- है तो, शहनाई है, 
बेटी- है तो, पायल की झंकार है! 
बेटी- है तो, बहु के आने का इंतजार है! 
बेटी- है तो, पिता ,भाई, पति, बेटा शब्द है! 

बेटी- है तो, श्रृंगार है मेहंदी है, 
बेटी- है तो, तीज त्योहार है! 
बेटी- है तो, नखरें हैं, खट्टी अमिया है! 
बेटी- है तो, दो  परिवार के बीच मजबूत संबंध है! 

बेटी- है तो, खनकती हँसी है, 
बेटी- है तो, गूंजती किलकारी है! 
बेटी- है तो, तुलसी है, आंगन है, 
बेटी- है तो, चौका है, पकवान है! 
बेटी- है तो, प्रेम शब्द की उपस्थिति है! 

बेटी- है तो, नारी शब्द है, 
बेटी- है तो, हर घर में रिश्तों का रूप है! 
बेटी- है तो, माँ, बहुत, बेटी,बहु, सास, स्वरूप हैं! 
बेटी- बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ, 
          क्योंकि?...... 
बेटी- है तो, चलती सृष्टि है! 

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श्वेता कर्ण! 
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