मैं चाहकर भी तुझसे रूठ नही पाती,
तेरे मनाने का अंदाज ही ऐसा है सनम।
जिसे हम प्यार करते हैं उससे ही झगड़ते हैं,
तेरी बात में भी है दम।
मत आदत खराब कर मुझे मना मनाकर,
बरन और नखरीले हो जाएंगे हम।
कितने प्यारे से इश्क से तुम,
छुइ मुइ से नाजुक मिजाज के हम।
बुलाती है तुम्हें मेरी हर धड़कन,
चले आओ छोड़कर सारे काम सजन।
काश यह दूरियां न होती हमारे बीच,
काश न होते हालात इतने वे रहम।
जब भी सोचूं तुम्हें पलक भीग जाते हैं,
क्या हमें भी इतनी शिद्दत से महसूस करते हो तुम।
तुम कोई कहानी नहीं जो कागज पर लिखूं,
यह मेरी सागर से भी गहरी चाहत है हमदम।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

0 टिप्पणियाँ