मेरी इस कविता के माध्यम से मैंने अनुभूत तुम्हारी आवाज़ के स्पर्श को शब्दों में पिरोकर उस अनुभव को व्यक्त करने का  प्रयास किया है, जो अपने प्रिय की आवाज़ सुनकर हर इंसान महसूस करता है,  

कहने वाला शब्दों में अपनी भावनाये ढ़ोल देता है तो सुनने वाला अपनत्व के गीलेपन में डूब जाता है.. 

आशा है आप सभी को पसंद आएँगी मेरी कविता जिसका शीर्षक है 

"तेरी आवाज़ का खुदुरापन " 

तेरी आवाज़ का खुरदुरापन 

छू लेता है मेरा रोम रोम 

मेरी संवेदनाओं के पोर पोर से टकराकर 

ले जाता है मुझे 

तेरे दर्द के सामानांतर...... 

मेरी भावनाओं में यूँ हो जाता है समाहित 

की तेरी आवाज़ का खुरदुरापन 

मुझे मेरे रुंधे गले से ही 

निकलता महसूस होता है.... 

तेरे शब्द आईना लगते है 

मेरे दर्द के... 

मै बन जाती हूँ तेरे संघर्षो की साक्षी.. 

तू ही बता,  कोई सपाट सी आवाज़ 

छू सकती है मुझे इतनी गहराइयों तक.. 

नहीं... कभी नहीं... 


सच,  तेरी आवाज़ का  खुरदुरापन 

महसूस होता है मुझे.. 

बड़ी शिद्दत से... 

मेरे भीतर, गहराइयों तक... 

-------✍️कृष्णा सिंह "इतु " 
        चित्तौडग़ढ़, राजस्थान