जब आखिरी सांसें लेंगे हम,
पिया मांग में सिंदूर सजाना तुम।

हम होंगे न फिर साथ तेरे,
पर यादों में अपनी बसाना तुम।

जीवन की राहों पे संग चले,
उस साथ को न बिसराना तुम।

कभी याद आए जब मेरी बातें,
न आंखों में आंसू लाना तुम।

नोकझोंक जो मीठी अपनी,
उन्हें सोच कभी मुसकाना तुम।

कमरे की दीवार पे मेरी,
इक सुंदर तस्वीर लगाना तुम।

मैं न रहूंगी ध्यान रखने को,
तो खुद का खयाल प्रिय रखना तुम।

गर मुश्किल जो कभी आ जाए,
मुझे दिल की धड़कन में पाना तुम।

जब आखिरी सांसें लेंगे हम,
पिया मांग में सिंदूर सजाना तुम।
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           प्रीति ताम्रकार
           जबलपुर