अभिव्यक्त मौन की परिभाषा मै... 
अतृप्त स्वप्न सी अभिलाषा मै...
मै धरा सी,  लिए जीवन का अंकुर 
मै अम्बर सी विस्तृत निरंतर 
मै पंछी सी उड़ने को आतुर.. 
मै पथ सी बढ़ती अग्रसर... 
सुषुप्त चिंगारी सी,  रखती भीतर दावानल.
मै स्त्री,   संवेदनाओ का उदगम... 
वात्सल्य का मूर्त रूप हूँ मै... 
प्रतिज्ञा का दृढ़ स्वरुप हूँ मै... 
अनंत , अमिट, अद्भुत अनुभव सी.. 
मै जीवन हूँ,  जननी जीवन की... 
🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कृष्णा सिंहा "इतु "