मेरा दुख वो नही जो प्यार से मिले
दुख तो मेरा वो है 
कि कोई ओर दुखी हो मेरे सामने
और आँख मेरी भर आए!

मेरा दुख वो नही जो अपनो से मिले
दुख तो मेरा वो है
कोई ओर भूखा हो मेरे सामने
और तड़प मेरी बढ़ जाए


मेरा दुख वो नही जो व्यापार में मिले
दुख तो मेरा वो है
कि कोई गरीब रोए मेरे सामने 
और आँखे मेरी भर आए

मेरा दुख वो नही जो औलाद से मिले
दुख तो मेरा वो है
कि कोई अनाथ हो मेरे सामने
और ममता मेरी जाग जाए

मेरा दुख वो नही जो इंसान से मिले
दुख तो मेरा वो है
कि अगर इंसानियत शर्मसार जो मेरे सामने
तो खून में उबाल मेरे आ जाए


कोमल भलेश्वर
यमुना नगर ,हरियाणा