क्यों नाराज़ है वो हमसे? ,शाय़द हम कुछ लिखते नहीं,
अब कहां जाकर तलाशें,कहीं कोई ख्याल मिलते नहीं,
उठती ही नहीं ये कलम, शायद अब हम हममें नहीं,
अहसास सोए हैं, या यूं कहें कि, अल्फ़ाज़ जगते नहीं,
अब रात है,न दिन है यहां, शायद कोई आलम ही नहीं,
न नमी, न कोई प्यास है,शाय़द अब यहां कोई मौसम ही नहीं,
कहने को कुछ भी हो, मगर खालीपन भी यहां ख़ाली नहीं,
शुकर है कोई ख़्वाब नहीं, जो सामने मौजूद,मगर मेरा नहीं,
यूं तो वर्षों गुज़रे वो गया कहीं , मगर वो कहीं गया ही नहीं,
इक समंदर है अधूरी बातों का,मगर अफ़सोस वो कुछ कहता नहीं,
दूर है वो, जो बहुत पास है मेरे, इक इंतजार वो मगर कभी पूरा नहीं,
........✍️🌄🙏 कुछ कहानियां कभी खत्म नहीं होती.💕🙏
ऋतु बाजपेई

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