बड़े बदल गये हो तुम
जबसे उलझ गयी हूँ मैं
तबसे सुलझ गये हो तुम
बड़े बदल गये हो तुम
अक्सर कहते थे
साथ निभाएंगे हम तुम
घाव गर दे कोई
मरहम लगाएँगे हम तुम
मुस्कुराहट का मगर
ख्याल रखेंगे हम तुम
जबसे बदली है मेने राह
तबसे बदल गये हो तुम
बड़े बदल गये हो तुम
बहुत खुश हो अपनेपन में
गलियों में अपनी मचल रहे हो
वादे अपने याद नहीं या
शायद भूल रहे हो
ना पढते कोई गीत मेरा
अपनी कथा गढ रहे हो
अब ओझल हो रही है यादें
धूमिल हो रहे हो तुम भी
भीग रही है आँखे कबसे
अंजाने लग रहे हो तुम
बड़े बदल गये हो तुम
बड़े बदल गये हो तुम
कृष्णा की✍️ कलम से

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