कभी मेरा एतबार मत खोने देना,
मैं गलत हूँ मेरे दिल को
मेरी नजरों में गुनहगार मत होने देना ।
हमेशा हिफाजत से रखना मेरे मोम से जज्बातों को,
इसे कभी वे रहमियों का शिकार मत होने देना।
तुम आओगे लौटकर जाने के बाद,
मेरे इस विश्वास को बेकार मत होने देना।
बहुत नाजुक है मन के जज्बे सभाल लेना,
कभी किसी बेरुखी का वार मत होने देना।
बहुत ख्वाब हैं इन आँखों मे तुमसे वविस्ता,
कभी इन ख्वाहिशों को अश्कवार मत होने देना।
चाहते हैं तुम्हें हम कितना बयान कैसे करें,
मेरे इस प्यार को व्यापार मत होने देना।
अदब से पेश आना मेरी पाक मोहब्बत के साथ,
कभी जिक्र इसका सरे बाजार मत होने देना।
जो खत लिखें हैं तेरी मुहबतों में मैने,
उन्हें दिल की तिजोरी मर रखना अखबार मत होने देना
मेरे जिन्दगी के सजर पर तेरी चाहतों के परिंदे हैं
हटाकर इन्हें वे बाहर मत होने देना।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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