मकर संक्रांति आई
नई खुशियाँ लाई
जीवन में नई रश्मि छायी
वैक्सीन जो आई।
कोरोना की पतंग जो उडे
वो लौट कर ना गिरें
यह दुहाई है गगन से
जैसे समाया चाँद सितारों को
वैसे ही समा ले अपने आंचल में कोरोना को।
लम्बी डोर को ना मिले ढील
लग जाए वैक्सीन की सील
मकर संक्रान्ति के तिल
पोंगल ,लोहडी ,बीहू मिल
गाए नई धुन
कोरोना से जीते हम
मकर संक्रांति का सूरज
लाया नई किरण ।
मकर संक्रान्ति आई ......
डॉ .चेतना टिक्कीवाल

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