१.याद आते हैं
   वो चेहरे-मोहरे
    मेरे गांव के
२.कहां दिखावा
   सूरते भोली-भाली
   सीधी-सादी सी 
३.खेल तमाम
   तन मिट्टी से सने
    मन खुशी से
४.निश्छल उर
    सहज सरल से
    गांव के लोग
५.कभी न‌ देखा
   बच्चों में सीमा रेखा
   लक्ष्मण रेखा
  ६.कच्चे घर
     महकती गलियां
     स्नेह- सुगंध
७.घर- आंगन
   नन्हे नैन निहारे
    निहारिकाएं 
८.शर्म से सुर्ख
    अल्हड़ सी जवानी
    लोक-लाज में
९.मंदिर - चौक
   बच्चों के थे ठिकाने 
    खेल निराले
१०.श्रम बिंदु से
     सिंचित खलिहान
     पकते धान
११.खिलखिलाते
     लिपे - पुते आंगन
      रंगे त्योहार
१२.रिश्ते बंधे थे
     घर की देहरी से
      बुजुर्ग- राय
१३.नाज है आज
    गांव की गंवारन
    पढ़ी-लिखी सी
  १४.देश के प्राण
        बसते बहते हैं
        गांव की छांव 



            मीनाक्षी कुमावत'मीरा'
      रोहिड़ा (आबू पर्वत) ,राज.