बूढ़ी आँखो में से
झांकते हुए दिखते हैं....
कुछ अधूरे रह गए सपने ।

छलकती है आंसू बनकर
कुछ पूरी हुई ख्वाहिशें ।

सुनाती हैं आंखें सभी को
तमाम उम्र के किस्से ।

झांक कर देखोगे तो दिख जाएंगे
दिल के सारे हिस्से ।

बूढी आंखों को रहता है
अब भी किसी का इंतजार ।

उमड़ती घुमड़ती पलको में
सहेजकर रखा है अपना सारा प्यार ।

हाथ फेरकर सिर पर जरा सा
लुटाती देती हैं पल भर में सारा दुलार ।

बूढ़ी आंखें.....


मुकेश दूहन
सोनीपत हरियाणा