सुनो जी आज ।
डालकर हाथों में हाथ।
मुझे बाज़ार ले जाना।
तुम्हारी हाँ से ।
ऐसे हीं मैं तो चहक जाऊँगी।
दिला मुझे एक सुन्दर साड़ी।
अपनी पलकों में बैठाना।
तुम्हारी प्यार की नज़र से ही।
ऐसे हीं मैं तो सज जाऊँगी।
तुम्हारी नजरों से मैं।
और भी सवर जाऊँगी।
नही चाहिए स्वर्ण कोई गहना ।
ऐसे ही मै तो चमक जाऊँगी।
दो बोल तारीफ़ के बोल देना।
मै खुद में फूले नही समाऊँगी।
बिना लगाए गजरा ही।
ऐसे ही मै तो महक जाऊँगी।
साथ तुम्हारा एक पल भी।
मुझको सकुन देता है।
नही चाहिए फिर कोई धन दौलत।
ऐसे ही मै तो सबसे अमीर कहलाऊँगी।
नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया)🌹🌹
दिल्ली

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