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बड़ी दीदी, बड़े भैया की, 
है बात निराली! 
मैं हूँ घर में सबसे छोटी, 
मेरे लिए है हर दिन दिवाली! 
हँसती हूँ मुस्काती हूँ! 


खूब उधम मचाती हूँ, 
मम्मी से गर डाँट पड़े तो, 
दीदी आगे आ जाती हैं, 
पापा जी गर , देख , 
भी ले तो, भैया के, 
 पीछे छुप जाती हूँ! 


दीदी तो माँ जैसी ही लगती, 
पढ़ो लिखो, तुम सफल बनो, 
बातों बातों में मिठी झिड़की, 
भी दे जाती है! 
भैया दुनियाँ दारी की बातें, 
बहुत ध्यान से समझाते हैं! 


भीतर भीतर हँसते रहते, 
उपर से गुस्सा दिखलाते हैं! 
दीदी , भैया की हूँ मैं, 
प्यारी बहना, इससे आगे, 
मुझे नहीं है कुछ कहना!! 

             श्वेता कर्ण!