मेरी वफ़ा को तू न समझी तो कोई गम नही
अश्क़ों में खुद को भिगो दें ऐसे हम नही
तन्हा महफ़िल में मेरा इश्क़ है और मैं हूँ

इक नज़र देख लें तुझको बेताब रहा करते थे
शाम ओ सहर निगाहों में तेरे ख़्वाब रहा करते थे
तेरे होंठों का तिल है मेरे दिल में और मैं हूँ

तन्हा महफ़िल में मेरा इश्क़ है और मैं हूँ

तेरी बाहों में हम हर लम्हा बिताया करते थे
तेरी ज़ुल्फों से खेलते थे कितना सताया करते थे
तेरी ख़ुशबू है मेरी सांसों में और मैं हूँ

तन्हा महफ़िल में मेरा इश्क़ है और मैं हूँ

भूल न पाये है अब तक तेरे हुस्न के थे हम दीवाने
चाहे मिटा दिए हमने खुद ही उल्फ़त के अफ़साने
तेरी मोहब्बत है मेरी आँखों में और मैं हूँ

तन्हा महफ़िल में मेरा इश्क़ है और मैं हूँ

      –प्रीति ताम्रकार
          जबलपुर