कुछ रिश्तों का बस इतना ही मरम होता है
उनका मिलना बस ख़ुदा का करम होता है।
न किसी किताब न किसी कोश में,
उनका फलसफा रहता है।
उनकी परिभाषा में हर कागज,
हर कलम बेवफा रहता है।
एहसासों के स्पर्श और मौन संवाद रहते हैं
शायद खून से भी ज्यादा जज्बात गाढ़े रहते हैं।
अनाम रहकर भी उनके कई नाम होते हैं,
बस लिखने के लिए अल्फ़ाज़ नहीं होते हैं....
✍️🌄🙏 ऋतु बाजपेई
यदि कोई इसे महसूस कर सकें 💞

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