बचपन उधार दे दो।
सबकुछ ले कर दे दो।

याद आ रहा अभी।
नज़ारे, वो नज़र दे दो।

बड़े बनने की उम्मीद।
दरगुज़र कर के दे दो।

जो मज़ा था उन दिनों
फिर एक बार दे दो।

बेफिक्र हो के सोना।
वक़्त वो फिर दे दो।

माँ की डांट खाना।
फिर माँ का प्यार दे दो।

डाँटना प्यार से बाप का।
फिर एक बार दे दो।

पाठशाला के वो दिन।
मुझे बारबार दे दो।

छोटे छोटे दोस्तों से
बांटा था वो प्यार दे दो।

उस्ताद से सिखते थे।
बचपन की मार दे दो।

ख्वाबों में जो देखते थे।
वो घुड़ सवार दे दो।

पहने थे जन्म दिन पर
फूलों के हार दे दो।

पाया था बचपनों में 
मुझे फिर वो प्यार दे दो।

मासूम सी ज़िन्दगी के
चैनो सुकूँ उधार दे दो।


            फिरोज दहिवाला