ये हसीन मौसम ,
चांदनी रात......
चमेली की खुशबू -
ऐसे में काश!
तुम आ जाते तो।
किनारे से खोल,
प्यार की कश्ती,
मौजों के बीच में,
ले जाते जो ........
चांद चमचमाता है,
तारे टिमटिमाते हैं ,
कण कण बिखरी है,
चांदनी की अमृत।
पुरवाई के मृदु झोंकों सा ,
मेरे तन मन को,
बहला जाते जो ........
तुम्हारी याद मैं खोई,
तुम्हारे प्यार में डूबी,
नदी तट पर में बैठी ,
सजन आ जाते जो
दबे पांव चोरी चोरी ,
मेरी आंखों को प्रिय !
ढांप जाते जो....... .
तुम्हारे विरह में दिल ,
पपीहरा हुआ ,
मन मोर हुआ.......
आंखें चातक हुई,
ऐसे में काश!
स्वाति जल बन......
सजन आ जाते जो.... ..
स्वर्गीय प्रेमशंकर पाण्डेय
गोरखपुर

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