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🌻🍀🌻🍀🌻🍀🌻 ॐ 🌻🍀🌻🍀🌻🍀🌻🍀
                              
कुछ अन कहीं ,कुछ अन सुनी, 
कुछ अन देखी बातें,

जो छूट गया है जो सुनी नहीं ---
काश कर पाती वह बातें,

वह नारी है जिसे अपनों ने ही---
त्याग सिखा दिया,

जन्म लेते ही उसको---
बलिदान की देवी बना दिया,

कहते हैं एक नारी ही---
नारी का दर्द समझती है,

यह सच है लेकिन स्वार्थ की पट्टी---
आंखों से कहां उतरती है,

वह त्याग करेगी, बलिदान करेगी, 
सबका मान रखेगी,नाअभिमान करेगी ,

ना आत्म सम्मान करेगी क्योंकि वह नारीहै,
यह कलयुग है यहा नारी का सम्मान कहां होता है,

हर नारी में सीता भी नहीं, क्योंकि 
हर पुरुष में अब राम कहां होता है,

जीवन के इस दौर में कुछ तो अनुभव हुआ तुझे,
तू नारी है तू निर्बल नहीं,नहीं सहना अब अपमान तुझे,

हृदय तेरा कोमल है कोमल तेरी वाणी है,
लेकिन तुझ में शक्ति है,
एक दिन तुझे दिखानी है,
तू नारी है तू निर्बल नहीं, यह बात तुझे बतानी है,


   संगीता वर्मा✍✍