प्रेम एक ऐसा एहसास जो तप्त मरुस्थल पर
 मलय पवन के शीतल झोंके की भांति
व्याकुल हृदय को उल्लास से भर जाता है।
प्रेम वो बन्धन है जिसकी बेड़ियों में बन्ध कर
कभी घुटन नहीं होती।
बल्कि संवर जाता है जीवन का हर पल ओढ़ कर 
प्रेम सिक्त चुनर।
प्रेम वो पुष्प है जो सुवासित कर जाता है अंग प्रत्यंग।
प्रेम जो ऊंचे नभ में उड़ान भरे
मन का पाखी किलोले करते हुए।
प्रेम कभी दूरियों में घटता नहीं
ना ही डरता है।
 किसी के लिए वो क्षणिक अनुभूति ही प्रेम होता है 
परिभाषा से परे, परिधि में कभी ना बंधने वाला।
विस्तृत आकाश सा होता है प्रेम।
प्रेम वो दौलत है जो हमें दौलत से नहीं मिलती
अनमोल होता है प्रेम।
अद्भुत होता है।
सबको नहीं बल्कि 
नसीब वालों को हासिल होता है।



                 मणि बेन द्विवेदी
              वाराणसी उत्तर प्रदेश