प्रथम बीज संस्कारों का
सन्तान में एक माँ ही रखती है
फिर उस बीज को पोषित
समय-समय पर करती है
मिले शुद्ध हवा और पानी
ध्यान सदा रखती है
उचित खाद के लिए वो
शिक्षा का प्रबंध करती है
गुरुजनों की देखरेख में
बीज प्रतिपल बढ़ता है
बनकर विशाल वटवृक्ष
जगत को छाया देता है
विशाल वटवृक्ष के तले
बहुत से आशियाने बनते हैं
कुछ इस बीज का रोपड़
नयी- नयी जगह करते हैं
कभी पनपता ,कभी कुम्हलाता
कभी साथ पा अपनों का
विशाल रूप है पाता
संस्कारों का एक आदर्शमान
स्थापित कर जाता
आज के समय में ये बीज
बहुत नहीं मिलता है
दुर्लभ बीज के लिए
कहीं भूमि नहीं दिखता है
दूषित हवा और पानी
इसे पनपने नहीं देते हैं
कोशिश भी करे जो ये
कुसंस्कारों की खर-पतवार से
इसे भर देते हैं
इस पेड़ की रक्षा के लिये
माली के बहुत सजग रहना है
रखनी है नजर दिन-रात
प्रतिपल पहरा देना है
तब जाकर ये पेड़
जड़ जमा पायेगा
फिर आज दिन विशाल
वटवृक्ष में बदल जायेगा
एक बीज डाला जो माँ ने
उससे एक पूरी पीढ़ी
बदल जाती है
स्वंय के साथ -साथ
परिवार और समाज को
संस्कारों का पाठ पढ़ा जाती है।।
रचनाकर:- आशा झा सखी✍🏼✍🏼

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