पहली कहानी। 
         ये दिव्या की डायरी के पन्नों से लिए गये हैं। 
दिव्या की कहानी, उसी की जुबानी। 
     मेरे कानो में ईयर फोन लगे थे और मेरे दिमाग में दो नाम लगातार गूंज रहे थे, रोहित और विशाल। एक महीने पहले ही रोहित ने मेरा दिल तोड़ा था लेकिन, गलती उसकी नहीं थी। शायद परिस्थिति ही ऐसी बनी कि हमारे सम्बन्ध खराब हो गये। रोहित के मम्मी पापा ने उसके मोबाइल में मेरा मैसेज देख लिया था और उन्होंने मुझे फोन करके बहुत भला बुरा कहा था। 
मैं जानती थी कि उसके मम्मी पापा के हर दिन के तानों के कारण घर में रोहित का जीना भी मुहाल हो गया था। फिर, उसने ही मुझसे सम्बन्ध तोड़ लेने को कहा था। मैं बहुत रोई थी और वो भी काफी देर तक आसूं बहाता रहा था। 
फिर कुछ दिन बाद मेरे दोस्त विशाल ने मेरे सामने अपने प्यार का इजहार किया कि वो मुझसे बहुत प्रेम करता है। 
मेरे अंदर कहीं ना कहीं रोहित से अलग होने का दुःख और अकेलापन था इसलिए, मैंने विशाल के प्रेम को स्वीकार कर लिया। धीरे धीरे मैं विशाल के साथ सहज होने लगी थी पर मुझे विशाल से प्रेम नहीं हुआ था पर विशाल मुझे पागलपन की हद तक प्रेम करता था। और फिर एक दिन रोहित वापस आ गया। उसने मुझे कहा कि वो मेरे बिना नहीं रह सकता इसलिए वो वापस आ गया और अब उसे अपने मम्मी पापा की भी परवाह नहीं है। मेरे मन में तो आज भी रोहित कि मुहब्बत थी तो मैंने उसे इंकार नहीं किया और मैं विशाल से अलग हो कर फिर से रोहित से दोस्ती कर ली। 
                                             मुझे इस तरह से विशाल का दिल तोड़ने का अफसोस था पर मैं रोहित को बहुत प्यार करती थी। खैर, मैं समझ गई थी कि मैंने अपना सच्चा दोस्त खो दिया है। अब जब मैं ये लिख रही हूँ तो मेरे आसुओं से डायरी का ये पन्ना भीग रहा है! लेकिन मैं रो क्यों रही हूँ? मैं तो विशाल से प्रेम करती ही नहीं थी! 
    ........ ............... ........ ................. ........ ............ 
दूसरी कहानी! 
विशाल कि डायरी से! 
                      विशाल की कहानी, विशाल की जुबानी। 
मैं अपने कमरे का दरवाजा बंद करके बिस्तर पर लेटा हूँ और उदास गीत सुन रहा हूँ। जब से मैं दिव्या से दूर हुआ हूँ, उदासी ही मेरी जिंदगी बन गई है। मैं अपने कमरे में अंधेरा करके तकिये में मुंह छुपा कर अपने बिस्तर पर पड़ा हूँ। मेरा दिल पूरी तरह से टूट चुका है। 
"विशाल", विशाल बेटा! नीचे से मम्मी की आवाज आ रही है। विशाल बेटा नीचे आ कर खाना खा लो, मैं अभी किसी से बात नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने मम्मी से कहा? मुझे भूख नहीं है। मम्मी गुस्सा हो कर कहने लगी। तीन घंटों से तुम दरवाजा बंद करके पढ़ रहे हो, आकर खाना खा लो नहीं तो बीमार हो जाओगे। 
"मम्मी" मैं पढ़ाई नहीं कर रहा हूँ..... मैं रो रहा हूँ....... एक लड़की ने मेरा दिल तोड़ दिया है,....... " कहना तो मैं ये चाहता था पर मेरे मुंह से निकला, " मम्मी प्लीज, मैं अभी कुछ नहीं खाऊंगा"। मैं रोहित को कोस रहा था। लेकिन मैं जानता हूँ कि , जिस तरह मैं दिव्या को प्यार करता हूंँ उसी तरह, रोहित दिव्या से और दिव्या रोहित से प्यार करती है। मैं ही दोनों के बीच में आ गया। मैं दिव्या को भी भला बुरा कहना चाहता था पर कभी दिव्या ने तो मेरा फायदा नहीं उठाया फिर, उसने तो कभी मुझे ये नहीं कहा कि वो मुझे प्यार करती है। उसने तो ये कहा था कि वो मेरे प्यार को इसलिए स्वीकार कर रही है क्योंकि वो जीवन को चलाना चाहती है। दिव्या धोखेबाज नहीं थी, ये मेरा भाग्य हीही ये सब लिखा था। अब तो मैं यही कामना करता हूँ कि रोहित कभी दिव्या को धोखा ना दे और उसे हमेशा खुश रखें। मैंने दूसरे कॉलेज में दाखिला ले लिया ताकि दिव्या से मेरी मुलाकात ना हो पाये। देखते ही देखते तीन साल गुजर गये। मैंने मास्टर्स की पढ़ाई के साथ साथ अपने पापा के कंपनी में काम भी करना शुरू कर दिया था। 
..................  ............................  ......................... तीसरी कहानी! 
रोहित, दिव्या से कह रहा है। दिव्या मुझे माफ कर दो। 
मैं तुम्हारा साथ नहीं दे सकता मैं मजबुर हूँ। 
दिव्या- ये तुम क्या कह रहे हो रोहित? 
मैं तुमसे अलग नहीं रह सकती। तुम अपने मम्मी पापा से
हमारी शादी की बात करो जाकर। नहीं दिव्या, मेरी मम्मी मुझे अपनी कसम देकर मुझे बेबस कर दी है, मैं उन्हें दुःख नहीं दे सकता। तुम भी जीवन में मुझे भूल कर आगे बढ़ जाओ। रोहित दिव्या को छोड़ कर चला जाता है। 
अब दिव्या और रोहित फिर से एक दूसरे से अलग हो गये। 
दो साल और बीत गये। 
...................  ................ ................ ...................... 
विशाल आज ऑफिस जाने के समय रास्ते में अपनी कार से रोहित को जाते हुए देखा लेकिन, कार में रोहित अकेला नहीं था। उसके साथ कार में एक लड़की बैठी हुई थी। विशाल ने ना चाहते हुए भी कार रोहित की कार के पीछे लगा दी। 
      कुछ देर बाद कार एक रेस्टोरेंट के सामने रुकी। कार से रोहित उतरा और साथ में वो लड़की भी। वो लड़की लाल साड़ी पहनी हुई थी और उसके माँग में सिंदूर भी था। 
विशाल देखते ही समझ गया कि ये रोहित की पत्नी है और दोनों की नई नई शादी हुई है। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है, दिव्या कहाँ है वो रोहित की पत्नी क्यों नहीं है?? 
.................  ................... ...................... ............ 
दूसरे दिन शाम को विशाल पाँच वर्ष बाद आज दिव्या के घर पहुँच गया। दिव्या के मम्मी पापा उसे स्कूल के समय से ही जानते थे। विशाल- आंटी दिव्या कहाँ है, मैं इधर से गुजर रहा था तो आ गया। 
दिव्या की माँ- दिव्या ऊपर के कमरे में है तुम ऊपर ही चले जाओ। विशाल ने पूछा? आंटी क्या दिव्या की शादी हो गई है क्या?? 
नहीं बेटा! उसके भाग्य में धोखा ही लिखा था...... कितना समझाया था कि उस लड़के के साथ अपना समय मत बर्बाद करो पर नहीं मानी......। क्या नाम था उस लड़के का। हाँ रोहित! 
रोहित के मम्मी पापा ने जब रोहित को अपने जायदाद से बेदखल करने की धमकी दी तो वह उनकी पसंद की लड़की से शादी करके, मेरी दिव्या को छोड़ दिया। 
     आंटी ये तो बहुत गलत हुआ दिव्या के साथ। 
दिव्या के पापा ने विशाल से कहा! एक हफ्ते पहले ही रोहित की शादी हुई है और तब से दिव्या खुद को कमरे में ही बंद रखती है। खाने पीने का भी होश नहीं है उसे। अब तुम ही कुछ समझाओ। विशाल ऊपर दिव्या से मिलने गया और उसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए समझाया। दिव्या याद करो जब तुम पहली बार रोहित से अलग हुई थी तो मैंने तुम्हें सम्हाला था। आज मैं फिर आया हूँ दिव्या, मुझे अपना लो और भूल जाओ बीती बातों और गलतियों को। 
एक घंटे बाद जब विशाल ऊपर से नीचे आया तो साथ में दिव्या भी थी और वो खुश थी। दिव्या के मम्मी पापा हैरान रह गए। 
विशाल ने दिव्या की माँ से कहा आंटी अंकल, आप लोग इजाजत दे तो मैं दिव्या को अपने मम्मी पापा से मिलवाने ले जाऊँगा। मैं दिव्या से शादी करना चाहता हूँ। 
दिव्या के मम्मी पापा खुश हो कर हाँ कर दिए। विशाल ने दोनों के पैर छू कर आशीर्वाद लिया और दिव्या का हाथ पकड़ कर बाहर ले आया और उसको प्यार से अपने कार में बैठा कर अपने घर की तरफ चल दिया।।........... 




                      श्वेता कर्ण!