मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में.....

बगीचे में जब -जब, 
आती है वो, तितली रानी, 
मन बाग -बाग हो जाता है, 

मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में.....

फूलों -फूलों पर मंडराती, 
बल खाती, इठलाती, 
उड़ -उड़ कर धूम मचाती, 

मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में..... 

इधर -उधर फुदक -फुदक कर, 
झट फूलों पर प्यार बरसाती, 
फिर दूर कहींं निकल जाती, 

मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में..... 

नन्हें -नन्हें हाथों से जब, 
उसे पकड़ने दोड़ी, गुड़िया रानी, 
फुर्र से वो उड़ जाती ,

मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में..... 

फूल हैं उसे बड़े ही प्यारे, 
फिर से आई तितली रानी ,
आजा -आजा कह उसे बुलाती, 

मन होता है,
तितली बन उड़ जाऊं में..... 

तितली रानी, तितली रानी, 
सब कह उसे बुलाते, 
पास वो, किसी के भी न आती ,

रंग -बिरंगी प्यारी तितली, 
बगीचे में डाला है उसने डेरा, 
उड़ -उड़ के वो अपना प्यार जताती, 

मन होता है, 
तितली बन उड़ जाऊं में..... 

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                      काव्य रचना -रजनी कटारे 
                             जबलपुर (म. प्र.) 

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