आज दोपहर में देखने बैठी
ऑन करके टेलीविजन
चैनल बदलते स्क्रीन पे आया
फ़ैशन टीवी वाला फ़ैशन

उसमें रैंप पे चल रही थी
एक बड़ी मनमोहिनी बाला
ओढ़ी थी परिधान वो देसी
पर अंदाज विदेशी वाला

पहनी थी वह लहंगा चोली
मैचिंग चुनरी भी डाली थी
पहनावा हिंन्दुस्तानी लेकिन
अंग्रेजों सी चाल निराली थी

मिलती नही लिबास से
ऐसी भाव भंगिमा शून्य सी
है सपाट सा उसका चेहरा
बिल्कुल लगती मैनीक्विन सी 

         –  प्रीति ताम्रकार