कुछ कमी हो शायद पर ख्वाहिश यूं मरती नहीं
असफलताओं का दरिया गहरा भी हो गर तो
वक्त अब सम्हलने का है,ना रोकर इसे बर्बाद कर
हार जाना निशानी है कल अवश्य ही जीत होगी
जरा रुक खुद को तैयार कर,आगे बढ़ने के लिए
कीमत है हर पल की यहां ,ना इसे बेकार कर
मिटा दे किस्मत की लिखी बेकार लकीरों को
अपनी भुजाओं में बल भर, निश्चय प्रबल कर
गर छोड़ दिया तन्हा अपनों ने ,तो तू तन्हाइयों में
खुद से बात कर ,ना अंधेरों में गुम हो,उजालों में
खुद से प्यार कर , हां तू खुद से प्यार कर।।
शैलजा

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