खबरों को जनता तक पहुंचाये वो अखबार।
रोज़ की बातें कागज पर छापे वो अखबार।

राह चलते फेरिये बूम लगाये, बेचते सबको।
सब के अपने शोख, ज्ञान दिलाये वो अखबार।

शुरुआत हुई खबरों की कागज पर प्रिन्ट से।
आज तो ऑनलाइन खबर लाये वो अखबार।

साधन बहुत ही हो गये अब इस विजाणु युग में।
फोन टीवी मोबाईल खबर सुनाये वो अखबार।

मोबाईल में भी आये नयी चेनल और अलग एप।
हर कोई  नया लाये और दिखाये वो अखबार।

आज विश्वास और अविश्वास बिच झूमे चैनलें।
कोई सच और कोई झूठ दिखाये वो अखबार।

मेंअयार जो पहले थी अब कहाँ देखने को मिले।
दौड़े दौलत के पीछे, न समझ आये वो अखबार।

विजाणु खबरें देखना भी हिम्मत भरा है काम।
एक खबर, हज़ार इश्तेहार दिखाये वो अखबार।

युग ऐसा आ गया की खबरों की भरमार हो गयी।
हमारी न चले, देखो जो भी दिखाये वो अखबार।

दिन चलते तकलीफ भरे, कैसे जीवन जिया जाय।
पढ़ने से बंदगी भली, दिमाग बिगाड़े वो अखबार।

निम्न स्तर की पत्रकारिता, निम्न स्तर हो गये लोग।
जीन पर कुछ आस ही न रख सकते वो अखबार।




              फिरोज दहिवाला