खूब कहा है किसी ने
जीवन का हर दाव शतरंज का खेल है।
बिसाद बिछी हुई है,चलना ढाई कदम है।
कभी आगे,कभी पीछे , कभी शह तो कभी मात है।
जीवन की हर घडी एक बिसात है।
रंगों में हजार रंग है,
कभी घुप कभी छाया है
जीवन की डगर में कहीं मोह तो कहीं माया है।
खूब खाओ, खूब खुश रहो।
ये एक जाल है, यहीं तो जीवन की बिसात है।
परिवार का प्यार छनी छाया है
बड़े बुजुरगों का आशीर्वाद
ईश्वर की छाया है।
मन में लग्न,और सम्मान जीवन का आधार है।
पल पल की ख़ुशी आपने के साथ यही तो जीवन की बिसात है।
लक्ष्मणी खरे🖌️
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

1 टिप्पणियाँ