तुमसे दूर होकर कैसे वक्त गुजारा मैंने,

होंठ हिले नहीं फिर भी पुकारा तुम्हे।

कैसे करूं मैं साबित कि तुम याद बहुत आते हो।

तुम्हे कोई एहसास नहीं,और मुझे तुम्हे बताना आता ही नहीं।

बहुत ज्यादा दूरियां है हमारे बीच में,

फिर भी तुमसे करीब कोई नहीं।

कितना बेबस हो जाता है इन्सान कि उसको खो सकता नहीं और पाना मुमकिन नहीं।

अब तो अजीब कश्मकश है कि खोने से ज्यादा पाने से डर लगता है।



                   हरप्रीत कौर