जब जिंदगी यु ही गुज़र रही हो।
जिसकी ना कोई रह़गुजर हो।
अचानक से मिले प्यार का वादा। 
सुख दुख करते हुए साझा।
रहमों की बारिश में। 
दिल कह गुजरता है।
कि जिंदगी मुझे अपने से प्यार हो गया ।

जब खिलने लगे किसी के अधरों पे ख़ुशी। 
और हम बने वज़ह उसकी। 
नये नये तराने गूंजने लगें कानों में। 
हम खूद में ही हो जाए बहनशी।
संगीतमय मन कह गुजरता है। 
कि जिंदगी मुझे अपने से प्यार हो गया। 

जब खुशबुएँ अपनी सुहानी लगे।
दिल डोल डोल नाचे झूमें। 
बहारे भी आकर मेरी जुलफें संवारे। 
अपनी अंगुलि का स्पर्श भी।
दिल में सिरहन पैदा करदे।
तब अपने से बातें करना कह गुजरता है। 
कि जिंदगी मुझे अपने से प्यार हो गया। 


अपने दिल की जब करने लगे हम।
इस नायाब तोहफा से ।
खिले हुए अन्तर्मन में दौड़ जाती तरंग। 
चहेरे पर नूरे बहार आ जाती है।
दर्पण देख नज़र खुद पर ठहर जाती है।
शर्मा कर लजरते गुलाबी होंठ कह गुजरते है। 
कि जिंदगी मुझे अपने से प्यार हो गया। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
                 दिल्ली