"गीत"
कह दो ना तुम मेरे हो,
साथ नहीं मगर किस्से तेरे हो...!
देख रही हूँ जो मैं उस
ख्वाब कि तुम दास्ताँ हो..!!
बीतें जो पल साथ में,
मुलाकात में, तेरी याद में,
उन्हें सपनों में सजाते रहूँ...!
दास्ताँ इस दिल की
दिल को ही सुनाते रहूँ..!!
चाहत का सफर कायम रहें,
बस तुम्हारी ही बातें करती रहूँ...!
तुम करीब ना सही, तुम्हारे
ख्यालों कि बारिश में भीगती रहूँ..!!
कह दो ना तुम मेरे हो,
साथ नहीं मगर किस्से तेरे हो...!
तुम दिल में ही नहीं दिल
की रोम रोम में धड़कते हो..!!
तुम बीन जीना आता नहीं
जुदाई का ऐ मौसम जाता नहीं...!
खामोश हूँ क्यों तु मेरी
खामोशी समझता नहीं..!!
कैसे करूँ तुम्हें खुद से जुदा
तुम तो मुझसेे ज्यादा मुझमें हो...!
तुम कोई ख्याल नहीं, तुम
तो मेरे अक्स का आईना हो..!!
कह दो ना तुम मेरे हो,
साथ नहीं मगर किस्से तेरे हो...!
बहुत है खूबसूरत चेहरे लेकिन
तुम ही आँखों में बसें हो..!!
आरती सुधाकर सिरसाट
बुरहानपुर मध्यप्रदेश

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