⚘⚘⚘⚘ॐ ⚘⚘⚘⚘
जिंदगी तो मिली है मेहरबानी तेरी,
पहचान नहीं मिल सकी, वो किस्मत है मेरी,
हमदर्द तो बहुत हैं हमदर्दी दिखाते हैं,
पर कोई मुझको अपना नहीं बताते हैं,
आईने के सामने अपने ही अक्स से---
कुछ बातें बनाती हूं, कौन हूं मैं मेरा अस्तित्व क्या है,
कौन है मेरी मां मेरा व्यक्तित्व क्या है,
फिर कानों में एक आवाज आती है,
कहां गई ओ बड़की,
आवाज इस सच्चाई से मेरा परिचय कराती है,
अरे मैं तो हूं बड़की, एक अनाथ आश्रम की लड़की,
जमाने की नजरों से,खुदको बचा नहीं पाती हूं---
मैं अपने आप मे ही सिमट जाती हूं,
अपनी सुरक्षा के लिए मैं,माँ का आंचल नहीं पाती हूं,
सुंदरता मेरा अभिशाप बन गई है,
हर घूरती हुई नजर बेबाक बन गई है,
वरदान को मैंने अभिशाप माना है,
सुंदर काया है लेकिन सर पर नहीं साया है
इन सभी बातों में अक्सर, खो जाया करती हूं,
अपने ही आपसे बात करते-करते सो जाया करती हूं,
फिर से वही कानों में आवाज आती है,
कहां है वो बड़की, अरे मैं तो हूं एक अनाथ आश्रम की लड़की।
.संगीता वर्मा✍✍

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