हम सारा दिन यह सोचते रहते हैं
क्यूं हर जगह तुम्हें देखते रहते हैं

बेचैनी सी भी है और सुकून भी
अलग सा महसूस हुआ जुनून भी

दिल की बात को समझ नहीं पा रहा
उठ रहे इस जज्बात को हूं मैं दबा रहा

कोशिश तो करते हैं पर कह नहीं पाते
कि क्यूं तुमसे दूरी अब सह नहीं पाते

अपने एहसासों को पन्नों पर बिछा रखा है
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखा रखा है




              राजू लधरोइया
                  पंजाब