पिया की सजी-धजी वो दुल्हन
छोड़ चली वो,बाबुल का आंगन
बीत गया जहां,बचपन वो यौवन
यादों को संजोए ,चली वो दुल्हन ।।
व्याकुल मन, अश्रुपूरित नयन
लिये नएअरमान,पिया की दुल्हन
छोड़ चली प्यारा अपना आंगन
खुशियां बिखेरने,पिया की दुल्हन।।
कली बन फूल खिले,नए बगियन
फूलों सा महके, जो नवजीवन
पिया की प्यारी, पिया की दुल्हन
रिश्तों को निभाए, जो आजीवन ।।
मनीषा महेंद्र ठाकुर
कर्नाटक

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