उम्मीद की लकीरों को बनाओ अपना सहारा 
होता है जो भूल रखो 
अपने दिलों से दूर करके
बुझा दो अंधेरों को
हमेशा रहो धैर्य की दीपक जलाऐ 


मंजिल तुम्हारे पास है
चिंतन की जरूरत नहीं 
करते चलो इमान से मेहनत 
तुम्हें झुकने की जरूरत नहीं 


होता है जींवन में कई बार अंधेरा 
आशाओं की किरणें डूबने न पाये 
कर दे दूर उन त्रुटियों को
जो छिपा है दिल में तुम्हारे 


जींवन की तो मोड़ यहीं है 
पथ पर सम्हल कर चलना पड़ेगा
सामना करते रहो उन कठिनाइयों का
बेंहिचक जींवन में आगे बढ़ते रहोगे



     लेखक:- विकास कुमार लाभ
                    मधुबनी (बिहार)