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पुरानी इस कहावत को ढाल बना कर रखा है,
मर्द को दर्द नहीं होता, एक सजा बना कर रखा है,
  सीने में एक दिल होता है, दर्द तो उसको भी होता है,
आंखें  उसकी भी होती हैं,पानी भी भर जाता है,
ना छलके  आंखों से पानी आंसू नहीं बहाता है,
हाड मास का ही तो होता, क्यों कठोर बन जाता है,
मन भारी जब होता होगा, आंसू क्यों छुपाता है,
आखिर एक इंसान है नहीं कोई भगवान है,
मर्द का ठप्पा लगा है कैसा, क्यों खुद से अनजान है,
उम्र हो 25 या 55 एक बात समझ नहीं पाता है,
एक दिल उसके सीने में है, जो भारी रह जाता है, जिम्मेदारियों के बोझ में स्वयं को भूल जाता है, 
सारी उम्र कमा-कमा कर, बैंकबैलेंस बना बना कर---
खुशियां क्यों नहीं पाता है, परिवार पर जान लुटाता है,
पुरानी एक कहावत को ढाल बनाकर रखा है,
मर्द को दर्द नहीं होता एक सजा बना कर रखा है,
सीने में एक दिल होता है डर तो उसको भी होता है।


                
                 संगीता वर्मा✍✍