♥️👩❤️💋👩♥️
माना प्यार से बढ़ तकरार के, चर्चे हमारे है
पर तुम्हे कोई गैर देखे ये न हमको गँवारे हैं
हर जंग में हैं संग एक दूजे के हम
लेकिन
तुम पूरब से जीते हम सदा पश्चिम में हारे हैं।
मेरी खामियों में भी चमकते इश्क के सितारे हैं
बढ़ती कभी, घटती कभी ये दिल की मीनारे हैं
न कोई मेल हैं दोनो का हम ये जानते
लेकिन
हम वो इक नदी संग बहते जिनके दो किनारे हैं।
तो क्या हुआ हम जो यूं लड़ते और झगड़ते हैं
ऐसे प्रीत को पाने तो देवता भी तरसते हैं
कितना भी मैं कोसू तुम्हें, तूम दो उलाहना मुझे
लेकिन
तकरार के बादल से ही मोहब्बत बरसते हैं।
जीवन मे अब संग प्यार के तकरार हमारे हैं
तुम जैसे हो अब मेरे हो और हम बस तुम्हारे हैं
शिकवा शिकायत दूरियां, हो कितनी भी सुन
लेकिन
तुम मेरे सहारे हो और हम तेरे सहारे हैं।
♥️👩❤️💋👩♥️
🖊️ 🖊️🖊️
थ्रीमा विनोद साहू

1 टिप्पणियाँ