घिर घिर अंधियारा
पूरे गगन
रोशनी एक आश
की रखना नयन
ना हो मन में विचलित
होने के भाव
कब तक तम
खिलना ही है
रोशनी से सुबह गगन
नई ऊर्जा,नई जोश,नई उमंग
रख लो साथ
फिर कर लेना पथ
का चयन
आत्मविश्वास की तिलक
भी मस्तक पर लेना सजा
क्योंकि मंजिल तक की राह
नहीं आसान
चीरती प्रकाश तम
को पुरे गगन
फिर भी है अंधियारा को
कितना घमंड
प्रिया ✍️

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