चलो आज फिर से अपना
बचपन याद करते हैं----
दादी की गोदी,मम्मी की लोरी
फिर से आज सुनते हैं
रखकर सिर उनकी  गोदी में
फिर से आज सोते हैं
पापा की डांट,चाचा का लाड़
बुआ से की हर फरमाइश
आज फिर याद करते हैं
चलो बचपन तुझे आज
फिर से याद करते हैं--------
बहनों से वो  लड़ना,
भाई से वो झगड़ना
वो रूठना-मनाना
वो साथ - साथ खाना
वो सारी लड़ाइयां
वो प्यार याद करते हैं
चलो बचपन तुझे आज
फिर से याद करते हैं--------
पंडित जी के समोसे
साथ खट्टी- मीठी  चटनी
स्कूल  के बाहर वाली 
बूढ़ी काकी के उबले हुए बेर
शर्मा जी की जलेबी का
स्वाद याद करते हैं
चलो बचपन तुझे आज
फिर से जी लेते हैं-------
वो स्कूल, वो कालेज हमारा
जिसने सँवारा जीवन हमारा
वो खेल का मैदान,
जिसने मिलाए हमसे दोस्त हजार
भागते दौड़ते स्कूल पहुंचना
बन्द होते गेट से हांफते हुए अंदर होना
कोचिंग की वो आड़ी-टेढ़ी
गलियाँ याद करते हैं
चलो बचपन तेरी हर
शैतानी याद करते हैं-----
कच्ची उम्र की नादानी
बहता समय का पानी
बढ़ती उम्र के आगे
बचपन की वो कहानी
सारी वहीं रह गयी
उम्र आगे बढ़ गयी
और बचपना छूट गया
आज भी उस बचपन को
शिद्दत से याद करते हैं
चलो बचपन तुझे आज
फिर से याद करते हैं-------

आशा झा सखी✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼