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दिसम्बर की सर्द सुबह। इस जीवन की भाग दौर में जहाँ किसी को किसी के लिए वक़्त नहीं होता, वहीं ये सर्द मौसम बहुत सी यादें लेकर आती है। 
                                      सिया! जिसे सुबह से शाम तक 
कभी अपने लिये वक़्त ही नहीं मिलता। आज बच्चे और सिया के पति दोनों देर तक सोयेंगे क्योंकि आज रविवार की छुट्टी है। रही बात सिया की तो, हाउस वाइफ कि कभी छुट्टी हुई है क्या जो आज होगी। 
                              आज सिया सर्द मौसम में सुबह सुबह चाय का कप लेकर अपनी बालकनी में अकेली बैठी है लेकिन, ये अकेलापन उसे बहुत सुकून दे रहा है। औरत को तो खुद के लिए कुछ देर अकेले बैठने का मौका भी कम ही मिलता है, और जब उसके घर उसके अलावा कौन दूसरा काम करने वाला ना हो। 
                           ये बातें वो लोग समझ सकते हैं जिन्हें
पता होता है कि घर के मर्द की पगार कम और जिम्मेदारियां अधिक होती है तो उस घर की औरत दिल और दिमाग से कितनी उलझी हुई रहती है। क्योंकि ऐसे घर में, जब कुछ अच्छा हो तो, तारीफ मर्द की होती है, और जब कुछ कमी हो तो इल्जाम औरत पर आती है। यही सब सोचती सिया चाय पी रही थी। सर्दी के मौसम में तो दिन भी उदास ही रहता है क्योंकि सारे लोग अपने घर में ही रहते हैं। जैसे जैसे चाय की कप से भाप उड़ रही है, सिया को अपना मायका याद आ रहा है। सुबह सुबह मम्मी की आवाज़ आती" कि सिया उठ जाओ तो वो कहती उठ रही हूँ तंग मत करो "और जब वो देर से उठती तो भी मम्मी को उस पर प्यार ही आता। पर अब तो बहुत कुछ बदल चुका है, अब जितनी देर से उठेगी उतना ही देर उसे काम निपटाने में होगा। साहित्य, लेखन, ढे़र सारी कहानियाँ पढ़ने की शौकीन सिया कहीं खो सी गई है। कौन कहता है कि जिम्मेदारियां सिर्फ मर्दों के हिस्से ही आती है, जिन मर्दों के कंधे पर पूरे परिवार को चलाने की जिम्मेदारियां होती है, उस घर की औरत की उसमे बराबर की हिस्सेदार होती है अपने पति के साथ। सिया के दिल में ढे़र सारी बातें थी जो बाहर आने को बेताब थी। पर उसे फिर घर के भी तो काम करने थे। सिया ने सोचा, जब बच्चे पढ़ लिख जाएंगे, काबिल हो जाएंगे तब मैं सर्दी की सुबह और शामों को एन्जॉय करूँगी। पर शायद सिया को नहीं पता है कि औरत 
कि जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होती। किस्त किस्त ही सही, ऐसे ही उसे सर्दी का मौसम और याद को एन्जॉय करना पड़ेगा। इस तरह की जीवन जीने वाली लाखों सिया है इस दुनियाँ में। 


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श्वेता कर्ण! 
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