ना चाय पीने का शौक , ना हम कॉफ़ी के दीवाने है यार
बस एक प्याला जिंदगी ,थोड़ा सा सुकून कुछ यार  पुराने 

तोलती क्यू रही जज्बातों की आवारगी को हर पल
ऐसा तेरे ख़ज़ाने से चाहा भी नहीं कुछ हमने जमाने 

निभा ना सका अक्सर मेरे तरीकों को कोई एक भी
एक एक शर्त रखी ऐसी क्या सच की तस्वीर बना के 

वो बेचारगी के दिन थे  आज की रंगीन दुनिया पे भारी 
शर्म ही आने लगी खुद को दौलतमंद बताते बताते।।

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                         रेणू सिंह