पुलवामा हमले को लेकर माता-पिता के बीच जो संवाद हुए उसे मैं आपके समक्ष रख रही हूं।
(पुलवामा हमला दिनांक-१४ फरवरी २०१९,रात्रि १० बजे)

पिता---तुमने आज का समाचार देखा?????
मां--- कौन सा समाचार??
पिता---पुलवामा में हमारे 44 जवान शहीद हो गए।हमारे             देश की रक्षा करते करते।तुम इस बारे में क्या सोचती हो?
मां---मुझे बहुत दुख हुआ मैं तो सोच रही हूं, कि उस मां पर               
        क्या बीत रही होगी।वह बहन अब किसकी कलाई पर            
        राखी बांधेगी और वह पत्नी किसकी राह तकेगी.......
       ( मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं)
पिता---सही में कितना दुख सहन करना पड़ता है............
          बलिदानियो के परिवार वालों को!!! इसका अंदाजा      
          लगा पाना मुश्किल है।
मां--- हम घर पर इसलिए सुरक्षित हैं। क्योंकि देश की सीमा          
        पर हमारे जवान हमारे रक्षा के लिए तैनात हैं। मैं उन 
        वीर सपूतों को सादर नमन करती हूं।🙏
पिता---एक भारतीय होने के नाते हम सभी को वीर
          बलिदानियों का सम्मान करना चाहिए। और उनके
          परिवार वालों के दुख को समझना चाहिए।
मां---हम सब भारतीयों को एकजुट होकर आतंकवाद के
        खिलाफ संघर्ष में साथ देना चाहिए।और भारतीय होने 
        का अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
पिता---हां सही हैं,आतंकवाद के खिलाफ सख्त-से-सख्त
          कदम उठाना चाहिए।ताकि हमारे देश से नहींअपितु
          पूरी दुनिया से आतंकवाद का सफाया हो।....,.......
          फिर किसी भी मां का आंचल नहीं उजड़ेगा ।
                       " जय हिंद जय भारत "
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 (आज दिनांक 14 फरवरी हैं। वीर शहीदों को मेरा कोटि-कोटि नमन और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि)

                      ✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर
                                     कर्नाटक