वो लम्हें कितने हसीन थे जब तुम साथ थे। आज भी उन पलों को याद करती हूं तो होठों पर मुस्कुराहट आ जाती है।गुजरा हुआ वक़्त तो वापस नहीं आ सकता पर तुम्हारे साथ बिताए हुए आज भी जीने का संबल बने हुए हैं। जीवन की पथरीली राहों में, जब भी डगर मुश्किल होती है,जब कभी उदासी घेरती है ,अकेलापन सताता है, तो भाग कर जा बैठती हूँतुम्हारी यादों के झुरमुट में।जब कभी परेशान होती हूँतो सांझा कर लेती हूँ तुमसे वो सारी बातें। अच्छा लगता है मुझे ,तुमसे यूँ अपनी परेशानी बांटना।पता है क्यों,क्योंकि तुमने ही तो कहा था - अपनेआप को कभी अकेला मत समझना।मै हूँ न ,तुम्हारे साथ हर पल ,तुम्हारा साया बनकर ।तुम्हारे ये शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते है ।
"💐💐 मेरे खवाबों की मलिका तुम
तुम्हीं पर जान देता हूँ
हर एक सांसे ,हर एक धडकन
तुझी पर वार देता हूँ
हर एक बेताबी ,बैचेनी
तुम्हारे नाम करता हूँ
बसा लेना मुझे तुम
आज अपनी आँखों में ,ओ जाना
मैं तेरा ही तो साया हूँ
तुम्हारे साथ रहता हूँ।"💐💐💐💐
आज से लगभग दस साल पहले की बात है रात को घर की डोरबेल बजते ही दरवाजा खोला तो सामने अपरिचित पर मोहक सा चेहरा सामने था ।इससे पहले कि मै कुछ पूछती पतिदेव की आवाज आई ,अंदर चलो अनुराग ।इसे अपना ही घर समझो।अंदर आने का रास्ता देते हुए पतिदेव से आंखों ही आंखों में पूछा- कौन है ये? उन्होंने हमारा परिचय करवाते हुए बताया ये मेरी दोस्त नेहा का भाई है अनुराग।दिल्ली में रहता है वही जॉब करता है।किसी काम से यहाँ आना हुआ तो मुझसे भी मुलाकात कर ली ।परेशानी की बात ये है कि यहां इसकी बुआ का घर है पर वो लोग आज ही रिश्तेदारी में शादी में निकल गए और इसकी कल की गाड़ी है।बोल रहा था कल तक किसी होटल में रुक जाऊंगा पर मैंने कहा- कैसी बात करते हो ,अपना घर है चलो घर।तभी मैंने कहा आप संकोच न करें।अपना ही घर समझे।आपको जो भी चाहिए मुझे बोल दीजिये।रात को खाना खाते हुए बातें होती रहीं जिससे अनुराग का संकोच खत्म हो गया।खाने की तारीफ करते हुए अनुराग बोला आप खाना बहुत अच्छा बनाती हो।तभी मेरे पतिदेव बीच में बोल पड़े - मैडम तो बातें भी बड़ी अच्छी बनाती हैं।मैं तो पक जाता हूँ इसकी बकबक से।ये सुनकर सभी हंस पड़े।तभी इनका फोन बजा और ये बाहर जाकर बात करने लगे।अनुराग बोला- आपको याद है मैं आपकी शादी में आया था।तब मैं यहीं बुआ जी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था।जितनी सुंदर आप तब लगती थी उतनी आज भी हैं।अच्छा जी,मैंने जबाब दिया ।वैसे आपकी व भाई साहब की उम्र में कितना फासला है अनुराग ने मुझसे पूछा।चार साल , ये सुनकर अनुराग बोला- मतलब आप मेरी उम्र की हो।तभी मेरे पतिदेव आ गए और अनुराग से बोले सोरी यार ,कल सुबह अर्जेंट मीटिंग में जाना है ,तो अनुराधा तुम्हारा खयाल रखेगी।आप परेशान न हो भाई साहब ,आराम से मीटिंग अटेंड कीजिये।सुबह उठकर पतिदेव तो चले गए। मैंने फटाफट चाय नाश्ता तैयार किया ।तभी अनुराग आ गया।हम दोनों चाय लेकर लान में बैठ गए और सुबह की ताजगी का आनंद लेने लगे।अनुराग केबारे में जानने के उद्देश्य से मैंने उससे पूछा आपकी शादी हो गयी।अनुराग बोला - अपने मेरा इंतजार ही नही किया,क्या करूँ करनी पड़ी। ये सुनकर मुझे बड़ा बुरा लगा।मैंने गुस्से में घूरकर उसे देखा तो वो हंसते हुए मेरी आँखों में आंखें डालकर बोला
-आप नाराज न हो,मेरी बात को सुन लें आराम से, ठंडे दिमाग से।जब से मैंने आपको पहली बार देखा था ,तबसे आप मेरे दिल -ओ- दिमाग में बसी हो।दिन रात आपके ही खयालों से घिरा रहता हूँ,न दिन को चैन है न रात को आराम।मेरे होशोहवास पर सिर्फ आप ही छाई हुई हो,पागलों जैसी हालत है मेरी।यहाँ तक कि मेरी शादीशुदा जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। मैं इन सबसे निकलना चाहता हूँ सिर्फ इसलिए यहाँ आया हूँ।मुझे पता है आप किसी और की हो और मैं भी किसी और का हो चुका हूँ।तो हम लोग कुछ कर नहीं सकते।बस एक ही तमन्ना थी मेरी - अपने दिल का हाल आप तक पहुचाना ताकि मन की बैचेनी खत्म हो।दरअसल भाई साहब से मिलना तो बहाना था हम तो सिर्फ आपसे मिलने आये हैं।हमें पता है कि ये सब सही नहीं है पर हम भी अपने दिल के हाथों मजबूर हैं। रात भर हम सिर्फ आपके बारे में ही सोचते रहे ,ये सोचते रहे कि आपसे अपने दिल का हाल कैसे कहें।आप क्या सोचेगीं मेरे बारे में।बहुत हिम्मत करके हमने आपसे ये सब कहा है।ये बातें सुनकर मेरा तो दिल और दिमाग दोनों ही सुन्न हो गया।बहुत देर बाद मुंह से इतना ही निकला ,आप हमसे क्या चाहते हैं।अनुराग ने गंभीर होकर कहा - कुछ भी नहीं।हम दोनों की ही स्थिति ऐसी है कि हम लोग कुछ कर नहीं सकते हैं इसलिए दोनों ही अपने सात फेरों के बन्धन को ईमानदारी से निभाते हैं। बस एक बार, आप मेरे बारे में क्या सोचती हैं ये बता दीजिए।ताकि इस बैचेन दिल को चैन आ जाये।क्या आपको मेरा प्यार कबूल है।
💐💐"इश्क करते तो सभी हैं
पर होता किसी किसी को ही है
न जाने क्या बात ऐसी है तुझमें
कि हमें भी हो गया है तुझसे भी💐💐
इतना सुनकर अनुराग ने अनुराधा को जोर से गले लगा लिया।कुछ समय तक दोनों उसी अवस्था में रहे ,होश ही नहीं था दोनों को। तभी अनुराग ने अनुराधा से कहा- अनु ,मुझसे एक वादा करो।कभी भी कोई भी परेशानी आये ,तुम सबसे पहले मुझे बताओगी।बस इतना ही हक चाहिए मुझे तुमसे , तुम पर।आज मेरे दिल को अजीब सा सुकून महसूस हो रहा है।अब ईश्वर से ,इस जिंदगी में मुझे कोई शिकायत नहीं।तुम आराम से अपनी जिंदगी जिओ।कभी तुमको परेशान नहीं करूंगा।बस तुम अपना वादा याद रखना ।प्यार में डूबे हुए दोनों को काफी समय हो चुका था, तभी पतिदेव आ गए मीटिंग खत्म करके ।फिर अनुराग चला गया अपनी गाड़ी का समय होने पर।फिर न तो अनुराग मिला अनुराधा से और न ही अनुराधा ही मिली अनुराग से एकान्त मिलने पर भी।
"यादों के साये से " बाहर आते हुए सिर्फ अपने प्यार अनुराग की तस्वीर ही बसी थी मेरी आँखों में।
आशा झा सखी

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