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कल रात एक हसीन सपना आया---
सपने में,एक बच्चे ने धनुष उठाया,
चेहरे पर उसके तेज था,माथे पर तिलक था ,
तन पीतांबर वस्त्र से शोभित उसका वेश था
बोली मै तुम कौन हो कहां से आए हो---
चेहरे पर उसकी ऐसी मुस्कान आ गई,
जैसे कोई हसीन पुरवाई छा गई,
बोला वो मैं बहुत ही दूर से आया हूं,
कलयुग के पापी का संहार करूंगा,
धनुष को उठाकर उस पर वार करूंगा,
कुछ पल के लिए ऐसा, मुझको लगने लगा,
जैसे मैं कोई जादू नगरी में आ गई,
उससे पूछा तुम्हारा नाम क्या है,
परिचय अपना दो,तुम्हारी पहचान क्या है,
आए हो क्यों, यहां पर तुम्हारा काम क्या है,
चेहरे पर उसके मीठी सी मुस्कान छा गई,
मुस्कान में फरिश्ते की छवि आ गई,
बोला, आने का मेरा एक मकसद है---
कलयुग के राक्षसों का संहार करूंगा,
धनुष को उठाकर उन पर वार करूंगा,
यह सुनकर जैसे मेरे होश उड़ गए,
सच है यह सपना है, या कोई जादू है,
आंखों में मेरे, तेजस्वी रोशनी छा गई
हो गया सब धुंधला, सिर्फ परछाई आ गई
लगा तेज झटका, आंख मेरी खुल गई
कुछ पल के लिए लगा था कि मैं-
जादू नगरी में आ गई
मेरा यह सुहाना, सुबह का सपना था
लेकिन ये सपना लगता,बिल्कुल सच्चा था
संगीता वर्मा✍✍

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