अब तो मान लिया दिल ने
तन्हा ही रहना है
दिल का यह खालीपन
हमें खुद ही सहना है

उम्मीदों के चिरागों को
हम खुद ही बुझा देंगे
इन गहरे अंधेरों को
अपनी आदत बना लेंगे

दिल की बेचैनियों की
न करेंगे कभी शिकायत
अब तेरी बेरुखी को 
मानेंगे अपनी किस्मत

थामेंगे अब तो हम भी
खामोशियों का दामन
जब तक नही थमेगी
ये थकी थकी सी धड़कन

           प्रीति ताम्रकार
            जबलपुर