सपनों की राहें, व अंजान मंज़िल।
कोई न मिलता, कुछ भी न हांसिल।

नाकाम कोशिश में फसने से पहले।
समंदर में नैया, मिलता न साहिल।

हिम्मत के आगे हर कोई झुकता।
डर जो गये तो जीना भी मुश्किल।

बातें करे सुख दुःख की हर कोई।
ग़म जो पड़े, न होता कोई शामिल।

उमड़ते सैलाब कहने को तो दिलमें।
माँ-बाप प्यार की छोटी सी एक झील।

रहोगे अकेले, न मिले एक हमदम।
दुनिया तुम्हारी, रहोगे गर हिलमिल।

ज़माना बुरा है, लोग भी मतलबी है।
दूसरों की मानो, तो बना देंगे क़तिल।

साथ मेरे आये क्यों कोई वहां पर।
मुझे देख कर हंसे लोग खिल खिल।


            फिरोज दहिवाला