भारतीय महिलाओं को प्रणाम कीजिए 

8मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में आज की कड़ी में हम बात करेंगे विदूषी मैत्रेयी की

वैदिक काल में ऋषि मित्र की कन्या मैत्रेयी थी जो बहुत ही विदूषी थी और महर्षि याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी थी।
मैत्रेयी बेहद शांत स्वभाव की और अध्ययन, चिंतन, शास्त्रार्थ में गहरी रूचि रखती थी।

जब भी याज्ञवल्क्य जी को लगा की गृहस्थ आश्रम छोड़कर वानप्रस्थ के लिए जाना चाहिए  तो उन्होंने दोनों पत्नियों के सामने अपनी संपत्ति को बराबर हिस्से में बांटने का प्रस्ताव रखा।  उनकी पहली पत्नी ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया पर मैत्रेयी ने संपत्ति लेने से इनकार करते हुए कहा :-"मैं भी वन जाऊंगी और आपके साथ मिलकर ज्ञान और अमर तत्वों की खोज करूंगी"।
इस तरह अपने विवेक, बुद्धि का प्रयोग कर मैत्रेयी अपने पति के विचार संपदा के स्वामिनी बन गई।

हम  देवी मैत्रेयी, एक विदुषी महिला  की बात कर रहे हैं और वह भी वैदिक काल के समय की उस समय तो शायद पश्चिमी सभ्यता में मानव ने भी ढंग से रहना नहीं सीखा था वह लोग तो डायनासोर में उलझे हुए थे।
और आज उनके साथ-साथ हमारे खुद के लोग भी यह कहते हैं कि भारत में महिलाओं को पढ़ाया लिखाया नहीं जाता।
दुख होता है कि लोग अपने ही देश के महान इतिहास को नहीं जानते।

विदुषी मैत्रेयी का जीवन चरित्र हमें सिखाता है कि धन संपत्ति से आत्मज्ञान नहीं खरीदा जा सकता।
ज्ञान प्रमुख है बाकी चीजें गौण है।

#अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं



           वंदना शर्मा🙏