कल खबर मिली कि उसका पति किशन खतम हो गया, वह लकवे के कारण 8 साल से बिस्तर पर था।बहुत पीने के कारण उसकी यह हालत हुई ।अपनी 13 साल की लड़की और 9 साल के लड़के को उसी के भरोसे छोड़ वो काम पर जाती थी।काम - झाड़ू,पोछा,बर्तन का काम ।बच्चो की पढ़ाई हो इतने पैसे नही थे न बच्चो की रूचि। सुबह शाम पांच घरों में काम के बाद घर में पति और बच्चों का भी करती।माँ की गैर मौजूदगी में बीमार बाबा की लघुशंका और दीर्घशंका का ध्यान उस छोटी सी बच्ची को रखना होता।कम उम्र में ही एक माँ जैसी जिम्मेदार हो गई थी वो बच्ची,जो अपने बाबा और भाई दोनों का ख्याल रखती। बड़ी दया आती थी उन पर सब बोल रहे थे, बहुत कष्ट में जी रहा था उसका पति ,मुक्ति मिल गई।पर क्या सच में मुक्ति किशन को ही मिली थी?
प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

0 टिप्पणियाँ